सुबह थकान के साथ उठना दिन भर नींद आना काम में ध्यान न लग्न — इन सब की जड़ अक्सर ख़राब नींद होती है. स्लीप हाइजीन का मतलब है नींद के लिए सही माहौल और आदतें बनाना. ये 12 साइंस-बैकेद तरीके आपकी नींद बदल सकते हैं.

1–4: टाइम और रूटीन

(1) रोज़ एक ही टाइम पर सोएं और उठें — वीकेंड पर भी; बॉडी क्लॉक इसी से सेट होती है. (2) 7–9 घंटे की नींद का टारगेट रखें. (3) सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन बंद कर दें — नीली रौशनी नींद का हॉर्मोन मेलाटोनिन रोकती है. (4) सोने से पहले हलकी रूटीन बनाएं: किताब गरम दूध या हलकी सैर. नींद भी एक आदत है — उसे रोज़ ट्रैन करें.

5–8: कमरा और माहौल

(5) कमरा ठंडा अँधेरा और शांत रखें — 18–20°स आइडियल है. (6) गद्दे और तकिये आरामदायक हों; गर्दन में दर्द हो तो तकिया बदलें. (7) बहार का शोर हो तो एयरप्लग्स या वाइट नॉइज़ उसे करें. (8) बिस्टिर सिर्फ सोने के लिए उसे करें — बिस्तर पर काम या फ़ोन चलना दिमाग को कंफ्यूज करता है. बिस्तर देखते ही दिमाग को नींद का सिग्नल मिलना चाहिए.

9–12: खाना-पीना और दिनचर्या

(9) दोपहर के बाद चाय-कॉफ़ी काम कर दें — कैफीन 6–8 घंटे असर रखता है. (10) सोने से पहले भरी खाना न खाएं; हल्का डिनर 2–3 घंटे पहले लें. (11) रोज़ 20–30 मिनट धुप और वाक लें — दिन की रौशनी रात की नींद बेहतर करती है. (12) शाम को हलकी एक्सरसाइज ठीक है लेकिन सोने से 2 घंटे पहले तेज़ वर्कआउट न करें. दिन की आदतें रात की नींद तय करती हैं.

कब डॉक्टर को दिखाएं

अगर हफ्ते में 3 से ज़्यादा रात नींद न आये और ये 1 महीने से चल रहा हो या दिन में अचानक नींद के झटके आएं तो डॉक्टर से मिलें — ये इंसोम्निया या स्लीप एपनिया हो सकता है. नींद की गोली खुद से शुरू मत करें — आदत पद जाती है.