फ़ोन पानी में गिर गया, लैपटॉप चोरी हो गया, या वायरस ने सब कुछ लॉक कर दिया — ऐसी एक घटना सालों की यादें (फोटोज, वीडियोस, डाक्यूमेंट्स) मिटा सकती है. 3-2-1 बैकअप रूल दुनिया भर के एक्सपर्ट्स का सबसे भरोसेमंद फार्मूला है ताकि आपकी कोई फाइल कभी न खोये.
3-2-1 का मतलब क्या है?
3 = अपने इम्पोर्टेन्ट डाटा की काम से काम 3 कपीस रखें. 2 = इन कपीस को 2 अलग-अलग जगह (मीडिया) पर रखें — जैसे फ़ोन + एक्सटर्नल हार्ड डिस्क. 1 = एक कॉपी घर से दूर रखें — क्लाउड स्टोरेज या किसी और शहर में. एक ही जगह रखी हुई 10 कपीस भी एक बैकअप नहीं — अलग जगह होना ज़रूरी है.
बैकअप 1: आटोमेटिक क्लाउड सिंक
सबसे आसान शुरुआत है फ़ोन की फोटोज का ऑटो-बैकअप ऑन करना — गूगल फोटोज या आईक्लाउड में. ये मुफ्त (कुछ लिमिट तक) है और बिना कुछ किये रोज़ बैकअप होता रहता है. डाक्यूमेंट्स के लिए गूगल ड्राइव या वनड्राइव का ऑटो-सिंक काफी है. ऑटो-बैकअप ऑन करना 2 मिनट का काम है और सबसे बड़ा सुरक्षा जाल है.
बैकअप 2: एक्सटर्नल हार्ड डिस्क
महीने में एक बार अपनी ज़रूरी फाइल्स एक्सटर्नल हार्ड डिस्क या पेन ड्राइव में कॉपी कर लें. ये बैकअप इंटरनेट के बिना काम आता है और रैनसमवेयर से भी सुरक्षित रहता है — बस बैकअप के बाद डिस्क को कंप्यूटर से अलग करके रखें. डिस्क हमेशा कंप्यूटर से जुडी रहे तो वायरस उसे भी ख़राब कर सकता है.
बैकअप 3: दूर की कॉपी
आग, बाढ़ या चोरी में घर की सारी चीज़ें एक साथ जा सकती हैं — इसलिए एक कॉपी क्लाउड में या किसी रिश्तेदार के घर रखी डिस्क में होनी चाहिए. क्लाउड स्टोरेज आज बहुत सस्ता है और फॅमिली प्लान में और भी किफायती. दूर की कॉपी वो इन्शुरन्स है जिसकी ज़रुरत, उम्मीद है, कभी न पड़े.
बैकअप टेस्ट करना न भूलें
सबसे आम गलती है बैकअप बना कर भूल जाना. 3 महीने में एक बार चेक करें कि फाइल्स वाक़ई खुल रही हैं और नयी फोटोज बैकअप हो रही हैं. पुरानी डिस्क ख़राब भी हो सकती है. टेस्ट न किया हुआ बैकअप बैकअप नहीं — सिर्फ उम्मीद है.


